अब टाइपिंग की जरूरत नहीं:देसी ट्विटर कहे जाने वाले कू पर आया टॉक टू टाइप फीचर, रीजलन भाषाओं में बोलकर टाइप कर पाएंगे

देसी ट्विटर कहे जाने वाले कू ने यूजर्स के लिए नया टॉक टू टाइप फीचर लॉन्च किया है। यानी यूजर्स अब बोलकर मैसेज को टाइप कर पाएंगे। खास बात है कि ये फीचर देश की सभी रीजनल लेंग्वेज को सपोर्ट करता है। यानी अब पोस्ट के लिए स्मार्टफोन पर टाइपिंग की जरूरत नहीं होगी। इस फीचर को लॉन्च करके कू पहला ऐसा ऐप बन गया है जहां रीजलन लेंग्वेज को बोलकर टाइप कर सकते हैं।

फीचर को लॉन्चिंग पर कू के को-फाउंडर, अप्रमेय राधाकृष्ण ने कहा कि टॉक टू टाइप फीचर एक जादू के जैसा है। अब यूजर्स बिना कीबोर्ड की मदद से टाइप कर पाएंगे। यूजर बोलकर अपने मन के विचार इस सोशल प्लेटफॉर्म पर शेयर कर पाएंगे। ये फीचर उन यूजर्स के बेहद काम आएगा जिन्हें रीजनल लेंग्वेज लिखने में प्रॉब्लम आती है।

दूसरी तरफ कू के दूसरे को-फाउंडर, मयंक बिदावतका ने कहा कि हमें टॉक टू टाइप फीचर लॉन्च करने पर बेहद खुशी हो रही है। हम अपने सोशल प्लेटफॉर्म पर यूजर्स के लिए चीजों को आसान बनाना चाहते हैं। ऐसा फीचर आपको ट्विटर, फेसबुक या किसी दूसरे सोशल प्लेटफॉर्म पर नहीं मिलेगा।

7 भाषाओं को सपोर्ट करता है ऐप
ये ऐप अभी हिंदी, अंग्रेजी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, बंगाली और मराठी भाषाओं को सपोर्ट करता है। इस साल के आखिर तक ऐप पर कुल 25 भाषाओं होंगी। इस पर 140 वर्ड्स में मैसेज कर सकते हैं। यूजर को वॉइस और वीडियो मैसेज का भी ऑप्शन मिलता है।

ऐप पर 55 लाख यूजर्स
इस पर 55 लाख से ज्यादा यूजर्स जुड़ चुके हैं। इस साल इस ऐप को तेजी से ग्रोथ मिल रही है। कंपनी का कहना है कि उनका फोकस 10 करोड़ यूजर्स को जोड़ने पर है।

किसान आंदोलन से चर्चा में आया कू
किसान आंदोलन का ऐप को बहुत फायदा मिला है। आंदोलन के दौरान सरकार ने ट्विटर पर शिंकजा कसा। वहीं सरकार ने कू को सपोर्ट किया। कू का कहना है कि आत्मनिर्भर का बहुत महत्व है। हम लोकल हैं इसलिए यहां के लोगों की प्रॉब्लम को ज्यादा बेहतर तरीके से समझते हैं।

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